Uttarakhand: नैनीताल का लोकप्रिय पर्यटक स्थल बना इतिहास, दफन हो गई टिफिन टॉप पर बनी डोरोथी सीट

नैनीताल नगर की दक्षिणी पहाड़ी पर स्थित बेहद लोकप्रिय पर्यटक स्थल टिफिन टॉप चोटी पर बनी डोरोथी सीट मंगलवार देर रात्रि ढह गई। भूस्खलन के बाद यह पर्यटक स्थल इतिहास बन कर रह गया। रात 11 बजे के बाद तेज आवाज से शहर गूंज उठा और भारी भरकम बोल्डर टिफिन टॉप से नीचे आ गए। क्षेत्र में आबादी न होने से जानमाल की हानि की आशंका नहीं है।

नैनीताल के दक्षिण की 2290 मीटर की ऊंचाई पर स्थित टिफिन टॉप में हर वर्ष लाखों की तादाद में पर्यटकों सहित स्थानीय नागरिक बेहतरीन प्राकृतिक नजारों का आनंद लेने जाते रहे हैं। पर्यटकों से कहीं ज्यादा यह स्थान स्थानीय निवासियों में लोकप्रिय था। बीते कई वर्षों से यहां गहरी दरारें पड़ गई थीं और यह दरकने लगा था। अमर उजाला ने कई बार इस संबंध में आगाह करते हुए विस्तृत समाचार प्रकाशित किए थे। स्थानीय नागरिकों ने भी अनेक बार ज्ञापन देकर प्रशासन को समस्या से अवगत कराया था लेकिन इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और आखिरकार वह अनहोनी हो गई जिसकी लंबे समय से आशंका जताई जा रही थी।

नगर से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर हल्की चढ़ाई वाले चौड़े रास्ते से यहां जाना ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए अद्भुत अनुभव होता है। इस चोटी पर एक बेंच और चबूतरा बने थे जिसे डोरोथी सीट कहा जाता है। डोरोथी सीट से पूरे नैनीताल नगर उसके ठीक पीछे उत्तर दिशा में हिमालय की चोटियों का इतना सुंदर दृश्य नजर आता था जो किसी को भी मंत्रमुग्ध कर दे। इस स्थान से नजर आने वाला चारों दिशाओं में दूर-दूर तक की पहाड़ियों और मैदानी क्षेत्रों का आकर्षक दृश्य यहां की खासियत है। क्षेत्र में चाय नाश्ते की दुकान चलाने वाले दिनेश सूंठा बताते हैं कि दरारों की वजह से डोरोथी सीट तक जाना पहले ही खतरे का सबब बन चुका था। मंगलवार रात को दिनेश का भतीजा आशुतोष दुकान में ही सोया था। दिनेश और आशुतोष ने बताया कि पूरी डोरोथी सीट देर रात भारी आवाज के साथ भरभराकर गिर गई। क्षेत्रीय दुकानदार विमल सूंठा ने बताया कि भारी आवाज के साथ डोरोथी सीट ढह गई। अंधेरे, वर्षा और बोल्डर गिरने के भय से वह उसके निकट नहीं गया।

कर्नल केलेट ने अपनी कलाकार पत्नी डोरोथी की याद में किया था निर्माण
टिफिन टॉप में डोरोथी सीट का निर्माण ब्रिटिश सेना के अधिकारी कर्नल केलेट ने अपनी कलाकार पत्नी डोरोथी केलेट की याद में किया था। डोरोथी का इंग्लैंड जाते समय जहाज पर सेप्टिसीमिया से निधन हो गया था। डोरोथी अक्सर इस स्थान पर बैठ कर पेंटिंग बनाया करती थीं।

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